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Showing posts with the label Maulana Bilal Raza Qadri
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तू ने बातिल को मिटाया ऐ इमाम अहमद रज़ा | फ़ैज़-ए-रज़ा जारी रहेगा / Tu Ne Batil Ko Mitaya Aye Imam Ahmad Raza | Faiz-e-Raza Jari Rahega

तू ने बातिल को मिटाया, ऐ इमाम अहमद रज़ा ! दीन का डंका बजाया, ऐ इमाम अहमद रज़ा ! ज़ोर बातिल का, ज़लालत का था जिस दम हिन्द में तू मुजद्दिद बन के आया, ऐ इमाम अहमद रज़ा ! अहल-ए-सुन्नत का चमन सर-सब्ज़ था, शादाब था ताज़गी तू और लाया, ऐ इमाम अहमद रज़ा ! तू ने बातिल को मिटा कर दीन को बख़्शी जिला सुन्नतों को फिर जिलाया, ऐ इमाम अहमद रज़ा ! ऐ इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत नाइब-ए-शाह-ए-उमम कीजिए हम पर भी साया, ऐ इमाम अहमद रज़ा ! 'इल्म का चश्मा हुवा है मौजज़न तहरीर में जब क़लम तू ने उठाया, ऐ इमाम अहमद रज़ा ! हश्र तक जारी रहेगा फ़ैज़, मुर्शिद ! आप का फ़ैज़ का दरिया बहाया, ऐ इमाम अहमद रज़ा ! है ब-दरगाह-ए-ख़ुदा 'अत्तार -ए-'आजिज़ की दु'आ तुझ पे हो रहमत का साया, ऐ इमाम अहमद रज़ा ! शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: मुहम्मद अश्फ़ाक़ अत्तारी मौलाना बिलाल रज़ा क़ादरी असद रज़ा अत्तारी tu ne baatil ko miTaaya, ai imaam ahmad raza ! deen ka Danka bajaaya, ai imaam ahmad raza ! zor baatil ka, zalaalat ka tha jis dam hind me.n tu mujaddid ban ke aaya, ai imaam ahmad raza ! ahl-e-...

कर्बला के जाँ-निसारों को सलाम / Karbala Ke Jaan Nisaron Ko Salam

कर्बला के जाँ-निसारों को सलाम फ़ातिमा ज़हरा के प्यारों को सलाम मुस्तफ़ा के माह-पारों को सलाम नौजवानों गुल-'इज़ारों को सलाम कर्बला तेरी बहारों को सलाम जाँ-निसारी के नज़ारों को सलाम या हुसैन इब्न-ए-'अली मुश्किल-कुशा ! आप के सब जाँ-निसारों को सलाम अकबर-ओ-असग़र पे जाँ क़ुर्बान हो मेरे दिल के ताजदारों को सलाम क़ासिम-ओ-'अब्बास पर हों रहमतें कर्बला के शह-सुवारों को सलाम जिस किसी ने कर्बला में जान दी उन सभी ईमानदारों को सलाम भूकी प्यासी बीबियों पर रहमतें भूके प्यासे गुल-'इज़ारों को सलाम भेद क्या जाने शहादत का कोई उन ख़ुदा के राज़दारों को सलाम बेबसी में भी हया बाक़ी रही सब हुसैनी पर्दा-दारों को सलाम रहमतें हों हर सहाबी पर मुदाम और ख़ुसूसन चार यारों को सलाम बीबियों को, 'आबिद-ए-बीमार को बेकसों को, ग़म के मारों को सलाम हो गए क़ुर्बां मुहम्मद और 'औन सय्यिदा ज़ैनब के प्यारों को सलाम कर्बला में ज़ुल्म के टूटे पहाड़ जिन पे उन सब दिल-फ़िगारों को सलाम आल-ओ-असहाब-ए-नबी के जिस क़दर चाहने वाले हैं सारों को सलाम या ख़ुदा ! ऐ काश, जा कर फिर करूँ कर्बला के सब मज़ारों को सलाम ...

प्यारे नबी की आँख के तारे हुसैन हैं / Pyare Nabi Ki Aankh Ke Tare Hussain Hain

प्यारे नबी की आँख के तारे हुसैन हैं मौला 'अली के राज-दुलारे हुसैन हैं दिल को क़रार मिलता है नाम-ए-हुसैन से वल्लाह हम को जान से प्यारे हुसैन हैं रौशन कि जिन से 'इश्क़-ओ-वफ़ा की तमाम राह चश्म-ए-तलब में ऐसे मिनारे हुसैन हैं वो 'अज़्म हौसला है कि जिस की नहीं मिसाल सब्र-ओ-रिज़ा के बाब में न्यारे हुसैन हैं ज़ालिम यज़ीद मिट गया, ज़िंदा रहे हुसैन ये सोचना ग़लत है कि हारे हुसैन हैं कोई कमी हुसैन में मुमकिन हो किस तरह जब दस्त-ए-मुस्तफ़ा के सवारे हुसैन है वो कौन है जो जान है इस्लाम की, 'उबैद ! प्यारे हुसैन हैं, मेरे प्यारे हुसैन हैं ना'त-ख़्वाँ: मौलाना बिलाल रज़ा क़ादरी pyaare nabi ki aankh ke taare husain hai.n maula 'ali ke raaj-dulaare husain hai.n dil ko qaraar milta hai naam-e-husain se wallah ham ko jaan se pyaare husain hai.n raushan ki jin se 'ishq-o-wafa ki tamaam raah chashm-e-talab me.n aise minaare husain hai.n wo 'azm hausla hai ki jis ki nahi.n misaal sabr-o-riza ke baab me.n nyaare husain hai.n zaalim yazeed miT gaya, zind...

ये किस शहंशाह-ए-वाला की आमद आमद है | बोलो मरहबा / Ye Kis Shahenshah-e-Wala Ki Aamad Aamad Hai | Bolo Marhaba

ये किस शहंशाह-ए-वाला की आमद आमद है ये कौन से शह-ए-बाला की आमद आमद है ये आज काहे की शादी है, 'अर्श क्यूँ झूमा लब-ए-ज़मीं को लब-ए-आसमाँ ने क्यूँ चूमा रुसुल उन्हीं का तो मुज़्दा सुनाने आए हैं उन्हीं के आने की ख़ुशियाँ मनाने आए हैं फ़रिश्ते आज जो धूमें मचाने आए हैं उन्हीं के आने की शादी रचाने आए हैं चमक से अपनी जहाँ जगमगाने आए हैं महक से अपनी ये कूचे बसाने आए हैं ये सीधा रास्ता हक़ का बताने आए हैं ये हक़ के बंदों को हक़ से मिलाने आए हैं जो गिर रहे थे उन्हें नाइबो ने थाम लिया जो गिर चुके हैं ये उन को उठाने आए हैं रऊफ़ ऐसे हैं और ये रहीम हैं इतने कि गिरते पड़तों को सीने लगाने आए हैं यही तो सोते हुओं को जगाने आए हैं यही तो रोते हुओं को हँसाने आए हैं इन्हें ख़ुदा ने किया अपने मुल्क का मालिक इन्हीं के क़ब्ज़े में रब के ख़ज़ाने आए हैं जो चाहेंगे, जिसे चाहेंगे ये उसे देंगे करीम हैं ये ख़ज़ाने लुटाने आए हैं सभी रुसुल ने कहा, इज़्हबू इला ग़ैरी अना लहा का ये मुज़्दा सुनाने आए हैं 'अजब करम है कि ख़ुद मुजरिमों के हामी हैं गुनहगारों की ये बख़्शिश कराने आए हैं ये आज तारे ज़मीं की तरफ़ हैं क...

दिल-ए-उश्शाक़ में यूँ अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है / Dil-e-Ushshaq Mein Yun Azmat-e-Siddiq-e-Akbar Hai

इमाम-उल-मुस्लिमीन ! ख़लीफ़तुल-मोमिनीन ! इमाम-उल-मुस्लिमीन ! ख़लीफ़तुल-मोमिनीन ! दिल-ए-'उश्शाक़ में यूँ 'अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है कि क़ल्ब-ए-मुस्तफ़ा में उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है रसूलान-ए-सलफ़ में जो है रुत्बा ज़ात-ए-अहमद का सहाबा में कुछ ऐसी वुक़'अत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है दिल-ए-'उश्शाक़ में यूँ 'अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है कि क़ल्ब-ए-मुस्तफ़ा में उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है शरफ़ हासिल कसीर असहाब को हिजरत का है लेकिन नबी की इक़्तिदा में हिजरत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है दिल-ए-'उश्शाक़ में यूँ 'अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है कि क़ल्ब-ए-मुस्तफ़ा में उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है ख़ुदा की राह में असबाब-ए-दुनिया सब लुटा डाला कि हुब्ब-ए-मुस्तफ़ा ही दौलत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है दिल-ए-'उश्शाक़ में यूँ 'अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है कि क़ल्ब-ए-मुस्तफ़ा में उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है वो पहलु-ए-नबी में आज भी आराम-फ़र्मा हैं जहाँ में ये मक़ाम-ए-रिफ़'अत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है दिल-ए-'उश्शाक़ में यूँ 'अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है कि क़ल्ब-ए-मुस्तफ़ा में उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है नबी के 'इश्क़ में भी...

मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की / Musallam Hai Zamane Mein Wafa Siddiq-e-Akbar Ki

मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की रिज़ा-ए-मुस्तफ़ा ही है रिज़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की वही अत्क़ा, वही औफ़ा, वही आ'दल, वही अफ़ज़ल है कैसी मुनफ़रिद हर हर 'अदा सिद्दीक़-ए-अकबर की मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की लुटाया जिस ने माल-ओ-जान को राह-ए-नुबुव्वत में नबी पे हर क़ुराबत थी फ़िदा सिद्दीक़-ए-अकबर की मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की दिया किस को मुसल्ला मुस्तफ़ा ने भी, ख़ुदा ने भी नज़र आई ये 'अज़मत बारहा सिद्दीक़-ए-अकबर की मक़ाम-ए-अफ़ज़ल-ए-उम्मत को बाहम तोलने वालो 'अली मौला से पूछो इक़्तिदा सिद्दीक़-ए-अकबर की मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की वही चमका ज़माने में विलायत की बुलंदी पर पड़ी इक बार भी जिस पे निगाह सिद्दीक़-ए-अकबर की मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की ऐ 'आसिफ़ ! ये निगाह-ए-मुस्तफ़ा की ही तजल्ली है मिली सादात से मुझ को 'अता सिद्दीक़-ए-अकबर की मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की ना'त-ख़्वाँ: मौलाना बिलाल रज़ा क़ादरी musallam hai zamaane me.n wafa sidd...

नबी का जश्न आया है फ़िदा हैं आशिक़ान-ए-रसूल / Nabi Ka Jashn Aaya Hai Fida Hain Aashiqan-e-Rasool

सरकार की आमद ! मरहबा ! दिलदार की आमद ! मरहबा ! मंठार की आमद ! मरहबा ! सब मिल कर बोलो ! मरहबा ! नबी का जश्न आया है, फ़िदा हैं 'आशिक़ान-ए-रसूल नबी का जश्न आया है, फ़िदा हैं 'आशिक़ान-ए-रसूल जश्न-ए-आक़ा से हमें तो 'इश्क़ है और प्यार है झूम जाओ, 'आशिक़ो ! कि आमद-ए-सरकार है नबी का जश्न आया है, फ़िदा हैं 'आशिक़ान-ए-रसूल नबी का जश्न आया है, फ़िदा हैं 'आशिक़ान-ए-रसूल आज हैं हर जगह 'आशिक़ान-ए-रसूल महव-ए-ना'त-ओ-सना 'आशिक़ान-ए-रसूल नबी का जश्न आया है, फ़िदा हैं 'आशिक़ान-ए-रसूल नबी का जश्न आया है, फ़िदा हैं 'आशिक़ान-ए-रसूल जश्न-ए-आक़ा से हमें तो 'इश्क़ है और प्यार है झूम जाओ, 'आशिक़ो ! कि आमद-ए-सरकार है नबी का जश्न आया है, फ़िदा हैं 'आशिक़ान-ए-रसूल नबी का जश्न आया है, फ़िदा हैं 'आशिक़ान-ए-रसूल जश्न मीलाद का सब रहे हैं मना बंदगान-ए-ख़ुदा 'आशिक़ान-ए-रसूल नबी का जश्न आया है, फ़िदा हैं 'आशिक़ान-ए-रसूल नबी का जश्न आया है, फ़िदा हैं 'आशिक़ान-ए-रसूल जश्न-ए-आक़ा से हमें तो 'इश्क़ है और प्यार है झूम जाओ, 'आशिक़ो ! कि आमद-ए-सरकार है नबी ...

बाद-ए-रमज़ान ईद होती है | रब की रहमत मज़ीद होती है / Baad-e-Ramzan Eid Hoti Hai | Rab Ki Rahmat Mazeed Hoti Hai

बा'द-ए-रमज़ान 'ईद होती है रब की रहमत मज़ीद होती है जिस को आक़ा की दीद होती है उस पे क़ुर्बान 'ईद होती है बा'द-ए-रमज़ान 'ईद होती है रब की रहमत मज़ीद होती है 'ईद तुझ को मुबारक, ए साइम ! रोज़ा-दारों की 'ईद होती है बा'द-ए-रमज़ान 'ईद होती है रब की रहमत मज़ीद होती है रोज़ा-दारों के वासिते, वल्लाह मग़्फ़िरत की नवीद होती है बा'द-ए-रमज़ान 'ईद होती है रब की रहमत मज़ीद होती है बे-नमाज़ों की, रोज़ा-ख़ोरों की कौन कहता है 'ईद होती है ! बा'द-ए-रमज़ान 'ईद होती है रब की रहमत मज़ीद होती है जिस को आक़ा मदीने बुलवाएँ उस मुसलमाँ की 'ईद होती है बा'द-ए-रमज़ान 'ईद होती है रब की रहमत मज़ीद होती है मुझ को 'ईदी में दो बक़ी'अ, आक़ा ! जाने कब मेरी 'ईद होती है ! बा'द-ए-रमज़ान 'ईद होती है रब की रहमत मज़ीद होती है 'ईद, 'अत्तार ! उस की है, जिस को ख़्वाब में उन की दीद होती है बा'द-ए-रमज़ान 'ईद होती है रब की रहमत मज़ीद होती है शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी ना'त-ख्वाँ: हाजी बिलाल रज़ा अत्तारी ओवैस रज़ा ...

मुआफ़ फ़ज़्ल-ओ-करम से हो हर ख़ता या रब / Muaf Fazl-o-Karam Se Ho Har Khata Ya Rab

मु'आफ़ फ़ज़्ल-ओ-करम से हो हर ख़ता, या रब ! हो मग़्फ़िरत प-ए-सुल्तान-ए-अंबिया, या रब ! बिला-हिसाब हो जन्नत में दाख़िला, या रब ! पड़ोस ख़ुल्द में सरवर का हो 'अता, या रब ! नबी का सदक़ा सदा के लिए तू राज़ी हो कभी भी होना न नाराज़, या ख़ुदा या रब ! तेरे हबीब अगर मुस्कुराते आ जाएँ तो बिल-यक़ीन उठे क़ब्र जगमगा, या रब ! ख़ज़ाँ फटक न सके पास, दे बहार ऐसी रहे हयात का गुलशन हरा-भरा, या रब ! हमारे दिल से निकल जाए उल्फ़त-ए-दुनिया दे दिल में 'इश्क़-ए-मुहम्मद मेरे रचा, या रब ! नबी की दीद हमारी है 'ईद, या अल्लाह ! 'अता हो ख़्वाब में दीदार-ए-मुस्तफ़ा, या रब ! तेरे हबीब की सुन्नत की धूम मच जाए गली गली में फिरे मदनी क़ाफ़िला, या रब ! मेरी ज़बान पे क़ुफ़्ल-ए-मदीना लग जाए फ़ुज़ूल-गोई से बचता रहूँ सदा, या रब ! उठे न आँख कभी भी गुनाह की जानिब 'अता करम से हो ऐसी मुझे हया, या रब ! किसी की ख़ामियाँ देखें न मेरी आँखें और सुनें न कान भी 'ऐबों का तज़्किरा, या रब ! तुलें न हश्र में 'अत्तार के 'अमल, मौला ! बिला-हिसाब ही तू इस को बख़्शना, या रब ! शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी ना...

मरहबा सद मरहबा फिर आमद-ए-रमज़ान है | मरहबा सद मरहबा फिर आ गया रमज़ान है / Marhaba Sad Marhaba Phir Aamad-e-Ramzan Hai | Marhaba Sad Marhaba Phir Aa Gaya Ramzan Hai

मरहबा सद मरहबा ! फिर आमद-ए-रमज़ान है खिल उठे मुरझाए दिल, ताज़ा हुआ ईमान है या ख़ुदा ! हम 'आसियों पर ये बड़ा एहसान है ज़िंदगी में फिर 'अता हम को किया रमज़ान है तुझ पे सदक़े जाऊँ, रमज़ाँ ! तू 'अज़ीमुश्शान है तुझ में नाज़िल हक़ त'आला ने किया क़ुरआन है अब्र-ए-रहमत छा गया है और समाँ है नूर नूर फ़ज़्ल-ए-रब से मग़्फ़िरत का हो गया सामान है हर घड़ी रहमत भरी है, हर तरफ़ हैं बरकतें माह-ए-रमज़ाँ रहमतों और बरकतों की कान है आ गया रमज़ाँ, 'इबादत पर कमर अब बाँध लो फ़ैज़ ले लो जल्द, ये दिन तीस का मेहमान है 'आसियों की मग़्फ़िरत का ले कर आया है पयाम झूम जाओ, मुजरिमो ! रमज़ाँ मह-ए-ग़ुफ़रान है भाइयो बहनो ! गुनाहों से सभी तौबा करो ख़ुल्द के दर खुल गए हैं, दाख़िला आसान है कम हुआ ज़ोर-ए-गुनह और मस्जिदें आबाद हैं माह-ए-रमज़ान-उल-मुबारक का ये सब फ़ैज़ान है रोज़ादारो ! झूम जाओ, क्यूँ-कि दीदार-ए-ख़ुदा ख़ुल्द में होगा तुम्हें, ये वा'द-ए-रहमान है दो जहाँ की ने'मतें मिलती हैं रोज़ादार को जो नहीं रखता है रोज़ा वो बड़ा नादान है या इलाही ! तू मदीने में कभी रमज़ाँ दिखा मुद्दतों से दिल में ये 'अत्तार ...

रौनक़-ए-कुल-औलिया या ग़ौस-ए-आज़म दस्तगीर / Raunaq-e-Kul-Auliya Ya Ghous-e-Azam Dastagir

रौनक़-ए-कुल-औलिया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! पेशवा-ए-अस्फ़िया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! आप हैं पीरों के पीर और आप हैं रौशन-ज़मीर आप शाह-ए-अत्क़िया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! औलिया की गर्दनें हैं आप के ज़ेर-ए-क़दम या इमाम-अल-औलिया ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! थरथराते हैं, शहा ! जिन्नात तेरे नाम से है तेरा वो दबदबा, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! पैदा होते ही रखे रमज़ाँ में रोज़े, दिन में दूध का न इक क़तरा पिया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! जिस तरह मुर्दे जिलाए, इस तरह, मुर्शिद ! मेरे मुर्दा दिल को भी जिला, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! अहल-ए-महशर देखते ही हश्र में यूँ बोल उठे मरहबा सद-मरहबा ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! आप जैसा पीर होते क्या ग़रज़ दर दर फिरूँ आप से सब कुछ मिला, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! गो ज़लील-ओ-ख़्वार हूँ, बद-कार-ओ-बद-किरदार हूँ आप का हूँ आप का, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! रास्ता पुर-ख़ार, मंज़िल दूर, बन सुनसान है अल-मदद, ऐ रहनुमा ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म ! आइए मेरी मदद के वासिते दुश्मनों में हूँ घिरा, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-...

पीरान-ए-पीर लजपाल मीराँ / Peeran-e-Peer Lajpal Meeran

पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ ! नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ ! ख़ाक-ए-क़दम का मैं सुरमा बनाऊँ राह में तुमरी मैं पलकें बिछाऊँ महबूब-ए-रब्ब-ए-ज़ुल-जलाल मीराँ ! पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ ! नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ ! बुढ़िया की हसरत को तुम ने मिटाया बिछड़े पिसर से उसे फिर मिलाया डूबी हुई कश्ती दी निकाल, मीराँ ! पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ ! नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ ! सर पे विलायत का है ताज आ'ला नूर-ए-नबी का है काँधे पे दोशाला पंज-तनी रुख़ पे है जमाल, मीराँ ! पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ ! नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ ! क़ादरी सख़ावत के चर्चे बड़े हैं ग़ौस-ओ-क़ुतुब हाथ बाँधे खड़े हैं कर रहे हैं सब को माला-माल मीराँ पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ ! नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ ! वलियों ने क़दमों में गर्दन झुकाई साया-फ़िगन तुम पे है मुस्तफ़ाई आप की नहीं कोई मिसाल, मीराँ पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ ! नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ ! 'आसी के दिल को मदीना बना दो नूर-ए-मुहम्मद के जल्वे बसा दो कर दो करम, पीर-ए-बा-कमाल मीराँ ! पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ ! नूर-ए-नबी, मुस्तफ़...